आजकल बड़ी चर्चा है महिला के आरक्षण के प्रस्ताव की जो आज कल सारे राजनितिक दलों में घमासान का कारण बना हुआ है | क्या आपको लगता है की इस आरक्षण से समाज कोई क्रन्तिकारी बदलाव आ जाएगा | मने एक नहीं लगभग सारे परिवारों में देखा है कि जन्म लेने वाली लड़कियों के प्रति जितनी नफ़रत महिलाओं में होती है उतनी पुरुषों में नहीं \मेरे परिवार में आज से बाईस साल पहले मेरे बड़े भाई को लड़की पैदा हुई |मैं और मेरे भाई साहब दोनों उसके जन्म पर खुशियाँ मन रहे थे लेकिन मेरी दादी ,मेरी माँ ,मेरी बुआ आदि तमाम औरतें हैं दोनों भाइयों को कोस रही थीं कि क्यों नहीं हम लोग भी शोक मानते |उस दिन मुझे एहसास हुआ कि स्त्रियों कि शत्रु स्त्रियाँ ही है पुरुष नहीं|
इसिस्लिये महिला आरक्षण पर एक बात बार बार मेरे दिमाग में खौल रही है कि दृश्य मीडिया एक बहुत बड़े सच से आँखें क्यों मूंदे पड़ा है और क्यों इस महिला विधेयक को इस तरह पेश कर रहा है जैसे इसके पास होते ही समाज में स्त्रियों कि दशा ही बदल जायेगी |
क्यों चारो और झूठ का गहरा कुहासा फैला दिया गया है कि सच कोई सुनना ही नहीं चाहता ?
रविवार, 28 मार्च 2010
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